मध्य-पूर्व में इजरायल की नीतियों और हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर कई मुस्लिम देशों खुलकर नाराज़गी जता रहे हैं। अरब दुनिया से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक, इजरायल के खिलाफ कड़े बयान और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन इसी बीच दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया ने ऐसा बयान दिया है जिसने मुस्लिम देशों की आपसी राजनीति और रवैये पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंडोनेशिया का रुख
इंडोनेशिया, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, ने इजरायल के मुद्दे पर अन्य मुस्लिम देशों से अलग हटकर संयम और कूटनीति की वकालत की है। इंडोनेशियाई नेताओं का कहना है कि केवल गुस्सा दिखाने या बयानबाज़ी से समाधान नहीं होगा, बल्कि मुस्लिम देशों को एक साझा रणनीति और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।
“केवल नारे लगाने से हल नहीं निकलेगा”
इंडोनेशियाई विदेश मंत्री ने साफ कहा कि –
“इजरायल पर केवल गुस्सा निकालने से कुछ नहीं होगा, मुस्लिम देशों को एकजुट होकर ठोस पहल करनी चाहिए। अगर हम बंटे रहेंगे तो हमारी आवाज़ वैश्विक मंच पर कमजोर पड़ेगी।”
क्यों खास है इंडोनेशिया की बात?
- जनसंख्या और प्रभाव – इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है, इसलिए उसका बयान केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सामूहिक नेतृत्व का संदेश देता है।
- OIC में भूमिका – इंडोनेशिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) में सक्रिय भूमिका निभाता है, इसलिए उसका दृष्टिकोण अन्य देशों को प्रभावित कर सकता है।
- कूटनीतिक संतुलन – इंडोनेशिया ने हमेशा फिलिस्तीन का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही वह क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया का पक्षधर भी है।
मुस्लिम देशों को दिखाया आईना
जहां कई मुस्लिम देश केवल नाराज़गी जाहिर करने तक सीमित हैं, वहीं इंडोनेशिया ने याद दिलाया कि –
- मुस्लिम दुनिया आपसी मतभेदों में उलझी रहती है।
- फिलिस्तीन मुद्दे पर एक समान नीति अपनाने में अब तक विफल रही है।
- इजरायल का लाभ इसी बिखरेपन से होता है।
निष्कर्ष
इजरायल के खिलाफ बयानबाज़ी और गुस्से के बीच इंडोनेशिया का यह संदेश मुस्लिम देशों के लिए एक आईना है। यह बताता है कि अगर सचमुच फिलिस्तीन मुद्दे पर आगे बढ़ना है, तो सिर्फ नारों से नहीं बल्कि एकजुटता, रणनीति और ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है।










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