मुनीर से मुलाकात के 100 दिन बाद ट्रंप के दरवाजे पर पहुंचे शहबाज , दो बड़े एजेंडों के जरिए अमेरिका की हमदर्दी पाने की कोशिश

मुनीर से मुलाकात के 100 दिन बाद ट्रंप के दरवाजे पर पहुंचे शहबाज, दो बड़े एजेंडों के जरिए अमेरिका की हमदर्दी पाने की कोशिश

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका के दौरे पर हैं और उनकी मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली है। खास बात यह है कि यह मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है जब पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि यह बैठक पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की अमेरिका यात्रा के ठीक 100 दिन बाद हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज शरीफ दो बड़े एजेंडों के जरिए ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान की हमदर्दी पाने की कोशिश करेंगे।

पहला एजेंडा: आर्थिक मदद और निवेश

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बीते कुछ महीनों से गहरे संकट में है।

  • विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है।
  • महंगाई और बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है।
  • IMF से कर्ज पर कड़े शर्तों का बोझ पाकिस्तान की जनता और सरकार दोनों पर भारी पड़ रहा है।

शहबाज शरीफ अमेरिका से सीधे तौर पर वित्तीय मदद तो नहीं मांग सकते, लेकिन वे निवेश और व्यापारिक सहयोग की अपील जरूर करेंगे। पाकिस्तानी सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना शहबाज का प्राथमिक एजेंडा है।

दूसरा एजेंडा: कूटनीतिक और सामरिक हमदर्दी

पाकिस्तान की विदेश नीति हमेशा से अमेरिका पर टिकी रही है, लेकिन हाल के वर्षों में चीन और रूस के करीब जाने की कोशिश ने रिश्तों में खटास ला दी। अब शहबाज एक बार फिर अमेरिका की ओर झुकते दिख रहे हैं।

  • अफगानिस्तान में तालिबान से निपटने का मुद्दा पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती है।
  • भारत के साथ बढ़ते तनाव और कश्मीर पर पाकिस्तान की रट को अमेरिका से समर्थन दिलाना भी शहबाज की कोशिश होगी।
  • विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज अमेरिका को यह संदेश देना चाहते हैं कि पाकिस्तान अभी भी दक्षिण एशिया और खाड़ी क्षेत्र में “रणनीतिक सहयोगी” की भूमिका निभा सकता है।

मुनीर की यात्रा और शहबाज का मकसद

जनरल असीम मुनीर की अमेरिका यात्रा को पाकिस्तान में काफी अहम माना गया था। वहां सैन्य सहयोग, सुरक्षा मुद्दों और खुफिया साझेदारी पर चर्चा हुई थी। अब शहबाज उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक और आर्थिक लाभ हासिल करना चाहते हैं।

  • सेना और सरकार के बीच लंबे समय से तालमेल की कमी पर सवाल उठते रहे हैं।
  • लेकिन इस यात्रा से यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि पाकिस्तान एकजुट होकर अमेरिका का भरोसा जीतना चाहता है।

ट्रंप क्यों अहम हैं?

भले ही ट्रंप अभी चुनावी मोड में हों, लेकिन अमेरिकी राजनीति में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • ट्रंप प्रशासन के समय पाकिस्तान को मिली मदद और सामरिक भूमिका को दोहराने की उम्मीद शहबाज को है।
  • पाकिस्तान यह भी चाहता है कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के साथ मजबूत रिश्ते बनाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी सत्त बदलाव के बाद पाकिस्तान के हित सुरक्षित रहें।

निष्कर्ष

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि उनके लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान को अब अमेरिका की हमदर्दी की सख्त जरूरत है। यही वजह है कि शहबाज दो बड़े एजेंडों – आर्थिक सहयोग और सामरिक साझेदारी – को लेकर ट्रंप के दरवाजे तक पहुंचे हैं। अब देखना यह होगा कि अमेरिका और ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान की इस ‘दस्तक’ पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

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