शेयर बाजार में जारी गिरावट, लगातार चौथे दिन लुढ़का सेंसेक्स; निफ्टी भी दबाव में

शेयर बाजार में जारी गिरावट, लगातार चौथे दिन लुढ़का सेंसेक्स; निफ्टी भी दबाव में

भारतीय शेयर बाजार इस समय भारी दबाव में नजर आ रहा है। लगातार चौथे कारोबारी दिन बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार को भी बाजार की शुरुआत सुस्त रही और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में फिसलते दिखे। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये में उतार-चढ़ाव ने मिलकर बाजार का मूड बिगाड़ दिया है।

कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी फिसले

हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 41 अंकों की गिरावट के साथ करीब 84,518 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 53 अंक टूटकर 25,765 के स्तर पर आ गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, जिससे यह संकेत मिल गया कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर बना हुआ है।

बुधवार को भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। उस दिन निफ्टी 41.55 अंक या 0.16 फीसदी टूटकर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 120.21 अंक या 0.14 फीसदी की गिरावट के साथ 84,559.65 के स्तर पर बंद हुआ। यानी लगातार चार दिनों से बाजार को संभलने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है।

एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर

भारतीय बाजार पर एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी सीधा असर देखने को मिल रहा है। आज एशियाई शेयर बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। जापान का निक्केई शुरुआती कारोबार में करीब 1.53 फीसदी तक लुढ़क गया, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में भी करीब 0.57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 1.36 फीसदी और स्मॉल-कैप कोसडैक करीब 1.13 फीसदी नीचे रहा। वहीं ऑस्ट्रेलिया में S&P/ASX 200 इंडेक्स भी शुरुआती कारोबार में 0.3 फीसदी तक गिर गया। इन कमजोर संकेतों ने भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट को और ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

डेरिवेटिव एक्सपायरी से भी बढ़ी सतर्कता

आज सेंसेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी भी है। ऐसे दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है और निवेशक ज्यादा सतर्क रहते हैं। यही वजह है कि आज ट्रेडिंग की शुरुआत से ही बाजार में संभलकर कारोबार देखने को मिल रहा है।

टॉप लूजर्स और गेनर्स का हाल

शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज शेयर दबाव में नजर आए। सनफार्मा, TMPV, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), NTPC, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और BEL जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

वहीं दूसरी ओर कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। इंफोसिस, HCLTech, Tech Mahindra, TCS, SBI और ITC टॉप गेनर्स की सूची में शामिल रहे। IT और बैंकिंग सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन यह राहत कुल मिलाकर कमजोर ही साबित हुई।

सेक्टोरल इंडेक्स का हाल

सेक्टर के लिहाज से देखें तो आज निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा और निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। इन तीनों सेक्टर्स में करीब 1 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं निफ्टी IT इंडेक्स करीब 0.9 फीसदी और PSU बैंक इंडेक्स करीब 0.25 फीसदी की बढ़त के साथ ट्रेड करता नजर आया।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो यहां भी कमजोरी दिखी। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स और स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों ही करीब 0.10 फीसदी नीचे ट्रेड करते नजर आए।

ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत

वैश्विक बाजारों में भी हालात कुछ खास अच्छे नहीं हैं। 17 दिसंबर को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। नैस्डैक कंपोजिट में सबसे ज्यादा 1.81 फीसदी की गिरावट आई। इसके अलावा S&P 500 में 1.16 फीसदी और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.47 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजारों की इस गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा और वहां से होते हुए यह दबाव भारतीय बाजार तक पहुंच गया।

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से आ रहा है। बुधवार, 17 दिसंबर को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 1,172 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने उसी दिन 769 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर ज्यादा भारी पड़ा।
यह लगातार 14वां दिन है जब विदेशी निवेशकों ने बाजार से पैसे निकाले हैं। दिसंबर महीने में अब तक FIIs करीब 21,073 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं।

2. रुपये में कमजोरी
रुपये में गिरावट भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9 पैसे टूटकर 90.87 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।
हालांकि बुधवार को रुपये ने करीब 0.7 फीसदी की रिकवरी दिखाई, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों की चिंता पूरी तरह दूर नहीं हुई है। गुरुवार को रुपया 90.35 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद भाव के आसपास ही है।

3. अमेरिका के रोजगार आंकड़े और ब्याज दरों की चिंता
अमेरिका में नवंबर महीने के रोजगार आंकड़े भले ही मजबूत रहे हों और करीब 64,000 नई नौकरियां जुड़ी हों, लेकिन निवेशक अब दिसंबर के रोजगार आंकड़ों को लेकर सतर्क हैं।
इन आंकड़ों से अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा तय होगी, जिसका असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशक फिलहाल ज्यादा जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

आगे किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर?

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई बड़े वैश्विक फैसलों पर टिकी रहेगी।

  • UK में बैंक ऑफ इंग्लैंड के ब्याज दरों पर फैसले
  • यूरो एरिया के लिए ECB की पॉलिसी घोषणा
  • अमेरिका से महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़े
  • बैंक ऑफ जापान की पॉलिसी मीटिंग, जहां ब्याज दरों को बढ़ाकर 0.75 फीसदी किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है

इन सभी फैक्टर्स का असर भारतीय शेयर बाजार की चाल पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दबाव में है और गिरावट से उबरने के कोई ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और बड़े आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों के लिए सावधानी बरतना और बाजार की चाल पर कड़ी नजर रखना बेहद जरूरी है।

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