बिहार चुनाव 2025 की आहट के बीच जमालपुर विधानसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। यहां का सियासी गणित हमेशा से उलझा रहा है। कभी कांग्रेस ने यहां अपना परचम लहराया, तो कभी जेडीयू और आरजेडी ने बाजी मारी। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। सवाल ये है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर जीत का स्वाद चख पाएगी या चिराग पासवान के साथ खड़ा होकर जेडीयू इस सीट पर अपना खोया दबदबा वापस हासिल कर पाएगी।
जमालपुर का सियासी इतिहास
- जमालपुर सीट को हमेशा से हॉट सीट माना गया है।
- पिछली बार यहां कांग्रेस ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी।
- इससे पहले जेडीयू और आरजेडी ने बारी-बारी से इस सीट पर कब्जा जमाया।
- वोटरों का रुझान जातीय समीकरणों के हिसाब से बदलता रहा है।
कांग्रेस की रणनीति
- कांग्रेस इस बार भी अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रही है।
- पार्टी ने स्थानीय मुद्दों—जैसे रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य—को लेकर चुनावी एजेंडा तय किया है।
- कांग्रेस उम्मीदवार का फोकस युवाओं और महिला वोटरों पर है।
जेडीयू का समीकरण और चिराग का फैक्टर
- जेडीयू का इस क्षेत्र में पुराना जनाधार रहा है, लेकिन पिछली बार पार्टी पिछड़ गई थी।
- इस बार पार्टी ने चिराग पासवान के साथ गठजोड़ पर भरोसा जताया है।
- चिराग का युवा चेहरा और उनका प्रभाव जेडीयू को वोटों का फायदा दिला सकता है।
आरजेडी और अन्य दलों का रुख
- आरजेडी भी इस सीट को हल्के में नहीं ले रही।
- पार्टी युवाओं और अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने में जुटी है।
- वहीं, छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, जिससे मुकाबला और रोचक होगा।
वोटरों की प्राथमिकता
- स्थानीय लोग इस बार विकास और रोजगार के मुद्दे पर वोट देने की बात कर रहे हैं।
- जातीय समीकरण अभी भी बड़ा फैक्टर हैं, लेकिन युवाओं का झुकाव विकास आधारित राजनीति की ओर दिख रहा है।
निष्कर्ष
जमालपुर की लड़ाई इस बार बेहद कांटे की मानी जा रही है। कांग्रेस अपनी जीत दोहराना चाहेगी, जबकि जेडीयू-चिराग गठबंधन सीट पर वापसी के लिए हर दांव आजमा रहे हैं। आरजेडी और अन्य दल भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि जमालपुर का चुनाव इस बार बिहार की राजनीति में ट्रेंड सेट्टर साबित होगा।
















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