इस्लामाबाद। पाकिस्तान एक बार फिर अपने ही हालातों से जूझता दिखाई दिया। देर रात सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के आदेश पर पाकिस्तान आर्मी ने उत्तरी वज़ीरिस्तान और बलूचिस्तान के इलाकों में कथित आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में भारी बमबारी की गई, जिसमें 30 से ज्यादा लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। मरने वालों में कई आम नागरिक भी बताए जा रहे हैं। इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है।
रातों-रात चला खौफनाक ऑपरेशन
सूत्रों के अनुसार, सेना ने रात के अंधेरे में हेलिकॉप्टर और ड्रोन की मदद से संदिग्ध इलाकों को निशाना बनाया।
- कई घर पूरी तरह तबाह हो गए।
- स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेना ने बिना चेतावनी दिए अंधाधुंध बमबारी की।
- मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
शहबाज शरीफ की बौखलाहट
घटना की जानकारी मिलते ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बुरी तरह भड़क गए।
- उन्होंने सेना प्रमुख से तत्काल रिपोर्ट मांगी।
- कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई।
- विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार और सेना आम नागरिकों को आतंकियों के नाम पर कुचल रही है।
जनता में गुस्सा और डर
बमबारी के बाद से ही प्रभावित इलाकों में दहशत का माहौल है।
- सैकड़ों लोग सुरक्षित जगहों पर पलायन कर रहे हैं।
- अस्पतालों में घायलों की भीड़ लगी हुई है।
- सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टिंग
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी मुख्यधारा मीडिया इस खबर को दबाने की कोशिश कर रहा है। केवल कुछ स्वतंत्र पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया है।
- रिपोर्ट्स में कहा गया कि सेना इस कार्रवाई को “आतंकियों के खिलाफ सफलता” बता रही है।
- लेकिन स्थानीय लोग इसे “राज्य प्रायोजित हिंसा” कह रहे हैं।
भारत पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी?
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी हुक्मरान अक्सर ऐसी घटनाओं का ठीकरा भारत पर फोड़ते आए हैं।
- हो सकता है कि आने वाले दिनों में शहबाज और उनकी सरकार इस हमले को “भारतीय साजिश” बताकर प्रचारित करें।
- हालांकि, अभी तक इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं।
निष्कर्ष
पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा हालात एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। सेना प्रमुख आसिम मुनीर का यह कदम देश के भीतर गहरी नाराजगी पैदा कर सकता है। 30 से ज्यादा नागरिकों की मौत ने शहबाज सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि जनता के गुस्से और विपक्ष की सियासत के बीच पाकिस्तान का सत्ता संतुलन कैसे संभलता है।
















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