इटली इन दिनों हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के हालिया फैसले ने जनता का गुस्सा भड़का दिया है। जगह-जगह बसों और रेलवे स्टेशनों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, वहीं हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर भिड़ंत हुई, जिसके चलते कई शहरों में हालात बेकाबू हो गए।
आखिर मेलोनी ने किस पर लगाया ‘NO’?
सूत्रों के मुताबिक, मेलोनी सरकार ने हाल ही में एक अहम रिफॉर्म और सहायता पैकेज को खारिज कर दिया।
- यह पैकेज गरीब तबके और आप्रवासी समुदाय के लिए लाया जा रहा था।
- मेलोनी का तर्क है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ेगा।
- विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताया।
सड़कों पर कैसे भड़की आग?
- फैसले के विरोध में राजधानी रोम से लेकर नेपल्स और मिलान तक लोग सड़कों पर उतर आए।
- कई जगहों पर बसों और सरकारी वाहनों को आग लगा दी गई।
- रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ के चलते ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ।
- पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
सरकार बनाम जनता
- मेलोनी सरकार का कहना है कि “हम आर्थिक स्थिरता से समझौता नहीं करेंगे।”
- विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री मेलोनी की “NO पॉलिसी” ने देश को गृहयुद्ध जैसे हालात में ला खड़ा किया है।
- श्रमिक संघों ने भी इस फैसले को जनता की पीठ में “छुरा घोंपने” जैसा बताया।
अंतरराष्ट्रीय असर
- यूरोपीय यूनियन ने इटली से अपील की है कि वह प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाए।
- अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी इसका असर दिखा, यूरो की कीमत पर दबाव बना।
- विदेशी निवेशकों ने इटली के राजनीतिक माहौल को अनिश्चित बताया।
निष्कर्ष
मेलोनी सरकार का “NO” इटली में जनता बनाम सरकार की टकराहट में बदल गया है। सड़कों पर हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ यह बताती है कि जनता का गुस्सा अब सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ बगावत में बदल रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि मेलोनी अपने फैसले पर अडिग रहती हैं या फिर जनता के दबाव में कोई बड़ा बदलाव करती हैं।
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