संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 79वें सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत और रूस की साझेदारी पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और किसी दबाव में आकर निर्णय नहीं करता।
लावरोव ने मंच से बोलते हुए साफ कहा कि भारत और रूस के बीच दशकों पुराने संबंध आपसी भरोसे, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर टिके हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों की ओर से भारत पर रूस से आयात और ऊर्जा सहयोग को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।
लावरोव ने क्या कहा?
- भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ करते हुए लावरोव ने कहा –
“भारत किसी के इशारे पर नहीं चलता। वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानकर फैसले करता है।” - उन्होंने यह भी कहा कि रूस-भारत संबंध समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं और आज भी यह साझेदारी उतनी ही गहरी है जितनी शीतयुद्ध के दौर में थी।
- ऊर्जा, रक्षा और विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग आने वाले दशकों तक और मजबूत होगा।
पश्चिमी दबाव के बीच भारत की स्थिति
- अमेरिका और यूरोपीय संघ बार-बार भारत से अपील कर रहे हैं कि वह रूस से कच्चे तेल और हथियारों की खरीद कम करे।
- लेकिन भारत का साफ रुख है कि उसके फैसले उसके राष्ट्रीय हितों से तय होंगे, न कि बाहरी दबाव से।
- यही बात रूस ने UNGA में दोहराई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश दिया कि भारत ‘स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी’ यानी रणनीतिक स्वतंत्रता की नीति पर चलता है।
भारत-रूस संबंधों की गहराई
- रक्षा क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा सहयोगी रूस रहा है।
- परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और साइंस-टेक्नोलॉजी में दोनों देशों की साझेदारी लगातार बढ़ रही है।
- हाल ही में ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर भी दोनों देश एक-दूसरे के अहम साझेदार बने हैं।
क्यों अहम है यह बयान?
लावरोव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति बहुध्रुवीय (multipolar) हो रही है। अमेरिका और पश्चिमी देश जहां अपनी नीतियों को थोपना चाहते हैं, वहीं भारत जैसे देश स्वतंत्र रुख अपनाकर वैश्विक शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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