US Shutdown : अमेरिका एक बार फिर सरकारी शटडाउन (Government Shutdown) के संकट में घिर गया है। पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशें नाकाम रहीं और बजट को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण साढ़े 7 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को बिना सैलरी अनिवार्य छुट्टी (Furlough) पर भेजा जाएगा।
शटडाउन का कारण क्या है? (US Shutdown)
अमेरिका की संसद कांग्रेस में बजट को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
- रिपब्लिकन सांसद अधिक खर्च कटौती की मांग कर रहे थे।
- डेमोक्रेट्स स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं के लिए अधिक बजट चाहते थे।
- दोनों के बीच टकराव के कारण नया बजट पास नहीं हो सका और सरकारी एजेंसियों के पास खर्च चलाने के लिए फंड रुक गया।
किन-किन कर्मचारियों पर असर?
शटडाउन का सबसे बड़ा असर फेडरल एम्प्लॉयीज़ पर पड़ता है।
- लगभग 7.5 लाख कर्मचारी बिना वेतन छुट्टी पर घर भेजे जाएंगे।
- करीब 15 लाख आवश्यक सेवाओं (Essential Services) से जुड़े कर्मचारी काम पर तो आएंगे, लेकिन उन्हें सैलरी बाद में मिलेगी।
- रक्षा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, अस्पताल और पुलिस जैसी सेवाएं जारी रहेंगी।
ट्रंप की कोशिशें क्यों फेल हुईं?
डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों को एकजुट करने की कोशिश की, लेकिन आंतरिक मतभेदों के कारण वे असफल रहे।
- ट्रंप चाहते थे कि बजट को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार पर दबाव बनाया जाए।
- लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने कड़ा विरोध किया।
- नतीजा यह हुआ कि न तो अस्थायी समझौता हुआ और न ही नया बजट पारित।
आर्थिक असर
अमेरिका में शटडाउन का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
- पिछले शटडाउन (2018-19) में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 11 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।
- स्टॉक मार्केट में गिरावट आती है और डॉलर की वैल्यू पर दबाव बढ़ता है।
- आम नागरिकों को पासपोर्ट, वीज़ा, टैक्स रिफंड जैसी सेवाओं में देरी झेलनी पड़ती है।
वैश्विक असर
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए वहां का शटडाउन दुनिया पर असर डालता है।
- विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाता है।
- तेल और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
- भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है क्योंकि आईटी और आउटसोर्सिंग सेक्टर अमेरिकी कंपनियों पर निर्भर हैं।
पिछली बार कब हुआ था शटडाउन?
- अमेरिका का सबसे लंबा शटडाउन 2018-19 में 35 दिनों तक चला था।
- उस समय ट्रंप प्रशासन और डेमोक्रेट्स के बीच मैक्सिको बॉर्डर वॉल फंडिंग को लेकर टकराव हुआ था।
- अब 2025 में एक बार फिर अमेरिका उसी संकट से जूझ रहा है।
आगे क्या होगा?
- अब कांग्रेस को नया बजट पारित करने या अस्थायी फंडिंग बिल लाने की कोशिश करनी होगी।
- जब तक समझौता नहीं होगा, तब तक शटडाउन जारी रहेगा।
- ट्रंप और रिपब्लिकन सांसदों पर दबाव बढ़ेगा क्योंकि आम जनता नाराज है।
निष्कर्ष
US Shutdown का सीधा असर लाखों कर्मचारियों की जेब पर पड़ेगा।
ट्रंप की रणनीति फेल हो गई और राष्ट्रपति बाइडेन की सरकार भी दबाव में है।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस पर नजर गड़ाए हैं, क्योंकि अगर शटडाउन लंबा खिंचा तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी होगा।
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