बिहार सरकार ने हाल ही में सरकारी बंगलों के आवंटन (Allotment) और वैकेंट कराने से जुड़ा एक नया सिस्टम लागू किया है। नए नियमों के तहत अब पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों को दिए गए आवासों पर विशेष छूट खत्म कर दी गई है। इसी फैसले से Rabri Devi नाराज़ हो गईं।
नया सिस्टम क्या है? (सरकार का निर्णय)
बिहार सरकार ने यह व्यवस्था लागू की है कि:
- अब कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री या पूर्व जनप्रतिनिधि अनिश्चितकाल तक सरकारी बंगले में नहीं रह सकेगा।
- पद छोड़ने के बाद एक निर्धारित समय सीमा में बंगला खाली करना अनिवार्य होगा।
- जिन बंगलों पर दशकभर से कब्ज़ा या “लंबी अवधि” तक रहने की छूट थी, उन्हें भी तुरंत खाली कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- सरकारी बंगले केवल वर्तमान पद पर बैठे अधिकारियों और नेताओं को ही मिलेंगे।
राबड़ी देवी नाराज़ क्यों हुईं?
बिहार के इस नए सिस्टम के बाद सरकार ने कई पुराने आवंटन रद्द कर दिए। इन्हीं में शामिल था:
- Rabri Devi का पटना स्थित वर्तमान आवास
- परिवार से जुड़े अन्य सरकारी आवासों की जांच
सरकार की इस कार्रवाई को राबड़ी देवी और उनके परिवार ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
राबड़ी देवी का कहना है कि:
- पूर्व मुख्यमंत्रियों को यह सुविधा हमेशा से मिलती रही है
- अचानक से बंगला खाली करने का आदेश देना अनुचित है
- सरकार राजनीतिक दुर्भावना से काम कर रही है
उन्होंने बयान दिया कि यह व्यवस्था “विशेष रूप से हम लोगों को निशाना बनाने” के लिए लाई गई है।

सरकार का तर्क क्या है?
बिहार सरकार का कहना है कि:
- सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग रोका जाए
- जिन लोगों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वे बंगले खाली करें
- नए सिस्टम से पारदर्शिता आएगी और आवास की कमी भी दूर होगी
सरकार का यह भी कहना है कि यह नियम किसी एक व्यक्ति को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सभी पर समान रूप से लागू होगा।
राजनैतिक हलचल तेज
इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
- RJD ने इसे “प्रतिशोध की राजनीति” बताया
- वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि यह “सही और समय की जरूरत वाला निर्णय” है
निष्कर्ष
बिहार सरकार के नए सिस्टम के तहत सरकारी बंगलों के पुराने आवंटन रद्द कर दिए गए हैं और पूर्व मुख्यमंत्रियों तक को विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी।
इसी नीति के कारण राबड़ी देवी नाराज़ हुईं और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
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