China-Pakistan Defense Deal: पाकिस्तान को मिले 36 J-10C फाइटर जेट, क्या राफेल को देंगे टक्कर? | Pentagon Report

China-Pakistan Defense Deal: पाकिस्तान को मिले 36 J-10C फाइटर जेट, क्या राफेल को देंगे टक्कर? | Pentagon Report

China-Pakistan Defense Deal: दक्षिण एशिया की सुरक्षा तस्वीर एक बार फिर बदलती नजर आ रही है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य साझेदारी को लेकर अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन की ताज़ा रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं। 24 दिसंबर 2025 को जारी इस सालाना रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि चीन न सिर्फ पाकिस्तान को आधुनिक हथियार मुहैया करा रहा है, बल्कि उसे भारत के खिलाफ एक रणनीतिक “प्रेशर वॉल्व” के तौर पर इस्तेमाल भी कर रहा है। इसी कड़ी में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि चीन ने पाकिस्तान को आखिर कितने J-10C लड़ाकू विमान दिए हैं और क्या ये भारत के राफेल लड़ाकू विमानों को टक्कर दे सकते हैं?

पेंटागन रिपोर्ट में क्या कहा गया?

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान को कुल 36 J-10C अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट देने का फैसला किया है। इनमें से मई 2025 तक 20 विमान पाकिस्तान वायुसेना को सौंपे जा चुके हैं, जबकि बाकी विमानों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये सभी J-10C विमान अब पाकिस्तान वायुसेना (PAF) में सक्रिय रूप से शामिल हो चुके हैं और पाकिस्तान की हवाई ताकत को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत बना रहे हैं।

J-10C कितना खतरनाक है?

J-10C को चीन का एडवांस्ड 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट माना जाता है। इसमें कई अत्याधुनिक खूबियां मौजूद हैं—

  • AESA रडार, जिससे दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से ट्रैक किया जा सकता है
  • लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल्स
  • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, जो दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन को जाम कर सकता है

पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार, J-10C की तैनाती से पाकिस्तान को हवाई युद्ध में तकनीकी बढ़त मिल सकती है, खासकर तब जब उसे चीन से रियल-टाइम इंटेलिजेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलता रहे।

पाकिस्तान को मिल रही है चीन से बड़ी सैन्य मदद

J-10C सिर्फ एक हिस्सा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर पहले से ही JF-17 लड़ाकू विमान बना रहे हैं, जो पाकिस्तान की वायुसेना की रीढ़ माने जाते हैं।

इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान को

  • सशस्त्र ड्रोन,
  • आधुनिक एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी,
  • और निगरानी प्रणालियां
    भी दी हैं।

अमेरिकी रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि पाकिस्तान, चीन के लिए भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने का एक अहम जरिया बन चुका है।

क्या J-10C राफेल को दे सकता है टक्कर?

यही सवाल इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, J-10C किसी भी तरह कमजोर फाइटर जेट नहीं है। अगर वह राफेल को पहले डिटेक्ट कर ले और पहले मिसाइल फायर कर दे, तो मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, ज्यादातर पश्चिमी और स्वतंत्र सैन्य विश्लेषण अब भी राफेल को 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट्स में टॉप पर मानते हैं। इसकी वजहें साफ हैं—

  • ट्विन-इंजन रिलायबिलिटी, जो लंबी दूरी और कठिन हालात में ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती है
  • कॉम्बैट-प्रूवन रिकॉर्ड, जहां राफेल ने कई युद्ध परिस्थितियों में खुद को साबित किया है
  • बेहद वर्सेटाइल मल्टी-रोल क्षमता, जिसमें ग्राउंड अटैक, न्यूक्लियर मिशन और रेकॉनिसेंस शामिल हैं

2025 में हुए एक सीमित एयर क्लैश के बाद यह जरूर साबित हुआ कि J-10C को हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन कुल मिलाकर राफेल अब भी तकनीकी और ऑपरेशनल तौर पर आगे माना जाता है।

चीन की दोहरी नीति पर सवाल

पेंटागन रिपोर्ट में चीन की रणनीति को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया है। रिपोर्ट कहती है कि एक तरफ चीन भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की बात करता है, तो दूसरी तरफ वह पाकिस्तान को भारी मात्रा में हथियार देकर भारत पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाए रखता है।

अक्टूबर 2024 में भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट समझौते के बाद सीमा पर तनाव कम जरूर हुआ, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक चीन इसका इस्तेमाल अपने बड़े रणनीतिक हितों के लिए कर रहा है।

शक्ति संतुलन पर असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन-पाकिस्तान का यह सैन्य गठजोड़ दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि भविष्य में पाकिस्तान में चीनी सैन्य ठिकानों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे चीन की सैन्य पहुंच भारत की सीमाओं के और करीब आ सकती है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी नजर

रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि चीन भारत के साथ रिश्तों को सीमित रूप से स्थिर रखना चाहता है, ताकि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग बहुत ज्यादा गहरा न हो। हालांकि, भारत में चीन के इरादों को लेकर संदेह बना हुआ है और आपसी अविश्वास की वजह से रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा।

निष्कर्ष

पेंटागन की यह रिपोर्ट साफ करती है कि J-10C की डिलीवरी सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक चाल है। चीन जहां खुले मंचों पर शांति की बात करता है, वहीं पाकिस्तान को सैन्य रूप से मजबूत कर भारत पर दबाव बनाए रखने की नीति पर भी काम कर रहा है।

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