ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ भड़का जनआक्रोश अब खुली बगावत का रूप ले चुका है। दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं और 100 से ज्यादा शहरों तक पहुंच गए हैं। सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे लोग सीधे तौर पर ईरान की सत्ता व्यवस्था और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को चुनौती दे रहे हैं।
विशेषज्ञ इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे बड़ा जनआंदोलन बता रहे हैं। इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसकी कमान युवाओं और महिलाओं के हाथ में है। यही वजह है कि ईरान की सरकार इसे बेहद गंभीर चुनौती के तौर पर देख रही है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन क्यों भड़के?
ईरान में मौजूदा आंदोलन की जड़ें आर्थिक बदहाली में छिपी हैं। बीते कुछ सालों में ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हुई है।
- ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत ऐतिहासिक स्तर तक गिर चुकी है
- महंगाई दर रिकॉर्ड ऊंचाई पर है
- बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है
- खाने-पीने की जरूरी चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं
विरोध की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां व्यापारियों ने महंगाई और टैक्स के खिलाफ हड़ताल कर दी। देखते ही देखते यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और आर्थिक नाराजगी ने राजनीतिक विद्रोह का रूप ले लिया।
खामेनेई शासन के खिलाफ खुली चुनौती
जल्द ही प्रदर्शनकारियों ने केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि खामेनेई सरकार और धार्मिक सत्ता व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
महिलाएं हिजाब कानून और सामाजिक बंदिशों के खिलाफ सड़कों पर उतरीं, वहीं युवा वर्ग बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से गुस्से में है।
सरकार ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों को खुली छूट दी है।
- हजारों लोगों की मौत की आशंका
- हजारों गिरफ्तारियां
- कई शहरों में इंटरनेट ब्लैकआउट
- विदेशी मीडिया और सोशल मीडिया पर सख्त पाबंदी
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ईरान के कई शहरों में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।
भारत के लिए ईरान क्यों है इतना अहम?
ईरान में मची उथल-पुथल भारत के लिए सिर्फ एक विदेशी खबर नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, रणनीति और महंगाई पर पड़ सकता है।
1. चाबहार बंदरगाह
ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
- भारत ने इसमें करीब 500 मिलियन डॉलर (4000 करोड़ रुपए) का निवेश किया है
- यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से जोड़ता है
- चाबहार-जाहेदान रेल लाइन 2026 तक पूरी होनी है
अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ती है, तो इस प्रोजेक्ट में देरी भारत के लिए बड़ा झटका हो सकती है।
2. इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC)
INSTC भारत, ईरान और रूस को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण व्यापारिक कॉरिडोर है।
- इससे माल ढुलाई का समय 40% तक कम होता है
- खर्च में करीब 30% की बचत होती है
ईरान में अस्थिरता इस पूरे कॉरिडोर को प्रभावित कर सकती है।
3. तेल और व्यापार पर असर
ईरान दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है।
- ईरान में संकट बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है
- भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है
- तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल-डीजल, गैस और ट्रांसपोर्ट सब महंगे होंगे
इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और महंगाई और बढ़ सकती है।
भारत को फायदा या नुकसान?
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन भारत के लिए दो धार वाली तलवार साबित हो सकते हैं।
संभावित फायदे
- अगर नई सरकार भारत के साथ बेहतर रिश्ते चाहती है
- चाबहार और INSTC परियोजनाओं में तेजी आ सकती है
- भारत का क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ सकता है
संभावित नुकसान
- लंबे समय तक अस्थिरता से प्रोजेक्ट अटक सकते हैं
- तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
- अमेरिकी प्रतिबंध (CAATSA) फिर सख्त हो सकते हैं
- चीन को रणनीतिक फायदा मिल सकता है (ग्वादर पोर्ट)
- ईरान में फंसे भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में
चीन को क्यों मिल सकता है फायदा?
ईरान में अस्थिरता का फायदा चीन और पाकिस्तान उठा सकते हैं।
चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर भारी निवेश कर रहा है, जो चाबहार से सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है।
अगर चाबहार परियोजना कमजोर पड़ी, तो क्षेत्रीय संतुलन चीन के पक्ष में जा सकता है।
भारत सरकार की क्या है प्रतिक्रिया?
भारत सरकार ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ नीति अपनाई है।
- विदेश मंत्रालय हालात पर नजर बनाए हुए है
- भारतीय नागरिकों को प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने की सलाह
- ईरान स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने की अपील
सरकार फिलहाल किसी भी पक्ष में खुलकर बयान देने से बच रही है।
निष्कर्ष
ईरान में चल रहा यह आंदोलन सिर्फ एक देश की राजनीति नहीं बदल रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
भारत के लिए यह संकट आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक तीनों मोर्चों पर चुनौती बन सकता है।
अगर हालात जल्द सामान्य हुए, तो नुकसान सीमित रहेगा।
लेकिन अगर संकट लंबा चला, तो
महंगाई बढ़ेगी
तेल महंगा होगा
भारत की रणनीतिक योजनाएं प्रभावित होंगी
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान में सत्ता का भविष्य क्या मोड़ लेता है और भारत इस चुनौती से कैसे निपटता है।
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