नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हुए ब्लास्ट की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस हमले की साजिश भारत की सीमा के बाहर बैठी आतंकी नेटवर्क की इकाइयों ने मिलकर रची थी। जांच कर रही एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के हैंडलर PoK और अफगानिस्तान से ऑपरेट कर रहे थे, जो लगातार स्थानीय मॉड्यूल के संपर्क में थे।
हैंडलरों की पहचान और डिजिटल ट्रेल से खुलासा
जांच टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल कम्युनिकेशन और इंटरसेप्टेड चैट्स के आधार पर कई अहम इनपुट जुटाए हैं। इन्हीं डिजिटल ट्रेल्स से यह शक मजबूत हुआ है कि हमले की पूरी प्लानिंग सीमा पार से की जा रही थी।
सूत्रों का दावा है कि इन हैंडलरों ने भारत में मौजूद अपने संपर्कों को 10 करोड़ रुपये का लालच दिया था। माना जा रहा है कि यह रकम ब्लास्ट की तैयारी, लॉजिस्टिक्स और आगे की आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ऑफर की गई थी।

मनी ट्रेल पर फोकस
जांच एजेंसियां अब इस ‘10 करोड़ फंडिंग ऑफर’ की असली उत्पत्ति और पैटर्न का पता लगाने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि मनी ट्रेल की पुष्टि हो जाती है, तो यह आतंकी नेटवर्क के बड़े मॉड्यूल तक पहुंचने में मदद कर सकता है।
कई राज्यों में छापेमारी तेज
दिल्ली समेत कई राज्यों में तलाशी और छापेमारी तेज कर दी गई है। कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी जारी है। एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य शहरों में बड़ी वारदातों को अंजाम देना था, ताकि दहशत फैलाई जा सके।
सरकार ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
गृह मंत्रालय ने सभी जांच एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और मामले को हाई-प्रायोरिटी पर दर्ज कर लिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि देश में किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को जल्द बेनकाब किया जाएगा।
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