Operation Sindoor: 7 महीने बाद पाकिस्तान ने मानी सच्चाई, नूर खान एयरबेस हमले का कबूलनामा

Operation Sindoor: 7 महीने बाद पाकिस्तान ने मानी सच्चाई, नूर खान एयरबेस हमले का कबूलनामा

भारत के Operation Sindoor को लेकर सात महीने बाद पाकिस्तान की सियासी और सैन्य परतें खुद-ब-खुद खुलने लगी हैं। जिस हमले को पाकिस्तान अब तक या तो नकारता रहा या गोलमोल जवाब देता रहा, उसी पर अब उसके शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से मुहर लगा दी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के ताजा बयान ने न सिर्फ भारत के दावों को मजबूती दी है, बल्कि पाकिस्तान के अब तक के झूठे प्रचार की भी पोल खोल दी है।

दरअसल, भारत ने 7 मई को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष आम लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। चार दिन तक चले सैन्य टकराव के बाद 10 मई को संघर्ष थमा, लेकिन पाकिस्तान लगातार सच्चाई से मुंह मोड़ता रहा। अब सात महीने बाद वही पाकिस्तान सच मानने को मजबूर हो गया है।

पाकिस्तान ने माना – नूर खान एयरबेस पर भारत का हमला

इशाक डार ने पहली बार खुले तौर पर स्वीकार किया कि 10 मई की सुबह भारत ने नूर खान वायुसेना अड्डे पर हमला किया था। यह वही एयरबेस है जिसे पाकिस्तान लंबे समय से सुरक्षित और अजेय बताता रहा है। चार दिन के सैन्य तनाव के बाद यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान ने इस हमले को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि अब तक वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर “झूठे आरोप” लगाने की कोशिश करता रहा था।

ब्रह्मोस की मार, सटीक निशाने से मचा हड़कंप

हालांकि इशाक डार ने सीधे तौर पर ब्रह्मोस मिसाइल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से यह साफ झलकता है कि हमला बेहद सटीक और घातक था। रक्षा जानकारों के मुताबिक, नूर खान एयरबेस पर हमला ब्रह्मोस से किया गया, जिसने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम की असलियत उजागर कर दी।

बताया जा रहा है कि इस हमले में एयरबेस को भारी नुकसान हुआ, जिसे पाकिस्तान महीनों तक छिपाने की कोशिश करता रहा। सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्ट्स पहले ही इस ओर इशारा कर चुकी थीं।

सात महीने तक छुपाया गया सच

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर हमला हुआ ही नहीं था, तो पाकिस्तान ने अब सात महीने बाद इसे क्यों माना? विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, लीक हुई जानकारियां और अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के चलते पाकिस्तान को आखिरकार सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी।

यह कबूलनामा इस बात का सबूत है कि भारत की सैन्य कार्रवाई सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि रणनीतिक और निर्णायक भी थी।

पाकिस्तान ने मध्यस्थता नहीं मांगी?

इशाक डार ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि मई में हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने भारत से बातचीत के लिए किसी देश से मध्यस्थता नहीं मांगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका और सऊदी अरब खुद भारत से संपर्क करना चाहते थे।

यह बयान पाकिस्तान के पुराने दावों के बिल्कुल उलट है, जहां वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की गुहार लगाता रहा है।

अमेरिका और सऊदी अरब की एंट्री

डार के मुताबिक, 10 मई सुबह 8:17 बजे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन्हें फोन किया और बताया कि भारत युद्ध रोकने के लिए तैयार है। इसके बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने भी संपर्क किया और भारत से बातचीत की अनुमति मांगी।

इन कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने पर सहमति बनी और चार दिन चला तनाव खत्म हुआ।

ड्रोन और जेट गिराने के दावे, लेकिन सबूत नदारद

इशाक डार ने दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत के 80 ड्रोन में से 79 को रोक लिया और 7 भारतीय लड़ाकू विमान मार गिराए। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान के इन दावों को महज प्रोपेगेंडा करार दे रहे हैं।

राष्ट्रपति जरदारी का बयान – ‘नेता बंकर में नहीं छिपते’

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दौरान उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

जरदारी के शब्दों में, “अगर मरना होगा तो यहीं मरेंगे। नेता बंकर में नहीं छिपते।”
साथ ही उन्होंने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की तारीफ की और इसे भारत को दिया गया “ठीक जवाब” बताया।

ऑपरेशन सिंदूर क्यों बना पाकिस्तान के लिए दर्द

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह साफ कर दिया था कि अब आतंक के खिलाफ जवाब सीमित नहीं होगा। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया और यह संदेश दिया कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती

चार दिन तक चले इस संघर्ष ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों की पोल खोली, बल्कि उसकी कूटनीतिक कमजोरी भी उजागर कर दी।

निष्कर्ष

सात महीने बाद पाकिस्तान का यह कबूलनामा इस बात का सबूत है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक बड़ी रणनीतिक और सैन्य सफलता थी। जिस हमले को पाकिस्तान दबाने की कोशिश करता रहा, वही अब उसकी मजबूरी बन गया है।

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