UP Politics: 2 साल बाद साथ आए अखिलेश यादव और आजम खान, सामने आई पहली तस्वीर
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान करीब दो साल बाद एक ही मंच पर नजर आए, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लंबे समय से चली आ रही दूरियों के बाद दोनों नेताओं की पहली साझा तस्वीर ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है।
दो साल बाद दिखी सियासी नजदीकी
जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव और आजम खान की यह मुलाकात रामपुर में हुई, जहां दोनों नेताओं ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस मौके पर जब दोनों एक-दूसरे के गले मिले, तो वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल हो गई है और सपा समर्थक इसे “एकता की नई शुरुआत” बता रहे हैं।
पिछली बार क्यों बढ़ी थी दूरी?
2022 विधानसभा चुनाव के बाद सपा के भीतर कई मतभेद सामने आए थे। आजम खान पर दर्ज मुकदमों, जेल जाने और पार्टी से पर्याप्त समर्थन न मिलने को लेकर उनके समर्थकों में नाराजगी थी। वहीं, अखिलेश यादव ने तब कई बार कहा था कि पार्टी हर नेता के साथ खड़ी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक दोनों के बीच संवाद लगभग टूट चुका था।
अब जब दोनों नेता फिर से एक मंच पर दिखे हैं, तो इसे चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव से पहले सपा में नई जान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2026 की तैयारी में सपा अब पुराने नेताओं को फिर से साथ लाने की कोशिश कर रही है। आजम खान पश्चिमी यूपी में मुस्लिम मतदाताओं पर गहरी पकड़ रखते हैं, जबकि अखिलेश यादव का प्रभाव पूरे राज्य में फैला है। दोनों का साथ आना सपा के लिए एक बड़ा सियासी फायदा साबित हो सकता है।
विरोधियों की चिंता बढ़ी
भाजपा और बसपा खेमे में इस मुलाकात को लेकर हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों को अब यह डर सताने लगा है कि अगर अखिलेश यादव और आजम खान फिर से एकजुट होकर काम करते हैं, तो सपा का वोट बैंक एक बार फिर मजबूत हो सकता है। खासकर रामपुर, मुरादाबाद और संभल जैसे क्षेत्रों में इसका असर सीधा दिखेगा।
पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश
सपा कार्यकर्ताओं के बीच यह खबर किसी त्यौहार से कम नहीं रही। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “#AkhileshYadav” और “#AzamKhan” ट्रेंड करने लगे। कार्यकर्ताओं ने ट्वीट कर कहा – “अब सपा में फिर एकता लौट आई है।” कई लोगों ने इसे मुलायम सिंह यादव के जमाने की सियासी एकजुटता से जोड़ा।
सियासी संदेश साफ
इस मुलाकात से एक बात साफ हो गई है कि अखिलेश यादव अब पार्टी में सभी पुराने नेताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश में हैं। आजम खान के साथ तस्वीर सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि सपा के लिए एक नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत है।
आगे की रणनीति
सूत्रों की मानें तो आने वाले हफ्तों में अखिलेश यादव कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि सपा अब 2026 के चुनाव से पहले संगठन में बदलाव और गठबंधन की दिशा में बड़े फैसले ले सकती है।
















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