संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला, जब सरकार का अहम विधेयक VB–G Ram G Bill (भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण) बहुमत के साथ पास कर दिया गया। बिल के पारित होते ही विपक्ष ने सदन में जबरदस्त विरोध दर्ज कराया। नारेबाजी, वेल में आना और बिल के कागज फाड़कर फेंकने जैसी घटनाओं के चलते हालात इतने बिगड़ गए कि लोकसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
सदन का माहौल पूरी तरह से गर्म रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने बिना पर्याप्त सहमति और व्यापक विमर्श के यह विधेयक पास करा लिया, जबकि सरकार इसे ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है।
क्या है VB–G Ram G Bill?
VB–G Ram G Bill यानी भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) को सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पेश किया है। सरकार का दावा है कि यह नया कानून 20 साल पुराने MGNREG एक्ट की जगह लेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
सरकार के मुताबिक, इस बिल के जरिए—
- ग्रामीण इलाकों में स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे
- मजदूरों और किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी
- आजीविका से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा
हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकार ने MGNREG जैसी सफल योजना को कमजोर करने की कोशिश की है।
विपक्ष का हंगामा, सदन में फाड़े गए कागज
बिल पास होते ही विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कई सांसद वेल ऑफ द हाउस में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। इसी दौरान कुछ सांसदों ने बिल से जुड़े कागजात फाड़कर सदन में फेंक दिए।
हालात को संभालने की कई कोशिशों के बावजूद शोर-शराबा थमने का नाम नहीं ले रहा था। अंततः लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
शिवराज सिंह चौहान ने दिया सरकार का पक्ष
बिल पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। लगातार हो रही नारेबाजी के बीच शिवराज सिंह ने कहा—
“हम किसी से भेदभाव नहीं करते। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। पूरा देश हमारे लिए एक है। देश हमारे लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है। हमारे विचार संकीर्ण और संकुचित नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को मजबूत करना है। शिवराज सिंह ने विपक्ष से अपील की कि सदन में शांति बनाए रखी जाए ताकि बहस को आगे बढ़ाया जा सके।
बहस जारी रखने की मांग, लेकिन नहीं मानी बात
कांग्रेस सांसद केजी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि इस विधेयक को किसी स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए, ताकि हर पहलू पर गहन चर्चा हो सके।
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने यह मांग खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि—
- इस बिल पर पहले ही 14 घंटे से ज्यादा चर्चा हो चुकी है
- कई सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है
इसी बीच विपक्ष की नारेबाजी तेज हो गई। बावजूद इसके, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बहस को आगे बढ़ाने और विधेयक पर निर्णय लेने की मांग की।
‘नाम रखने की सनक कांग्रेस की है’: शिवराज सिंह चौहान
बिल के नाम को लेकर उठ रहे सवालों पर शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा—
“कितनी योजनाओं का नाम नेहरू परिवार पर रखा गया। राजीव जी के नाम पर 55 राज्य सरकार की योजनाएं हैं। 74 सड़कों के नाम राजीव गांधी पर हैं। 15 नेशनल पार्क नेहरू जी के नाम पर रखे गए हैं। नाम रखने की सनक कांग्रेस की है।”
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को नाम बदलने पर आपत्ति है, तो उसे पहले अपने अतीत को भी देखना चाहिए।
प्रियंका गांधी का बयान भी बना मुद्दा
इससे पहले 16 दिसंबर को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस बिल का विरोध किया था। उन्होंने कहा था—
“हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती। हम इस बिल का विरोध करते हैं।”
प्रियंका गांधी के इस बयान को लेकर भी सदन के अंदर और बाहर सियासी घमासान देखने को मिला।
14 घंटे तक चली चर्चा, 98 सांसदों ने लिया हिस्सा
गौरतलब है कि इस बिल पर लोकसभा में बुधवार को करीब 14 घंटे तक लंबी चर्चा हुई थी। कार्यवाही देर रात 1:35 बजे तक चली, जिसमें 98 सांसदों ने हिस्सा लिया।
विपक्ष ने बार-बार मांग की कि इस प्रस्तावित कानून को स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए, लेकिन सरकार ने इसे जरूरी नहीं माना।
सियासी टकराव के बीच पास हुआ अहम विधेयक
VB–G Ram G Bill का पास होना आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनने वाला है। सरकार इसे ग्रामीण भारत के लिए क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गरीबों के हक पर चोट करार दे रहा है।
फिलहाल, संसद में जो दृश्य देखने को मिला, उसने साफ कर दिया है कि यह बिल सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सियासी टकराव की नई लाइन खींच चुका है।
यह भी पढ़ें : IND vs SA 4th T20I रद्द: क्या दर्शकों को मिलेगा टिकट रिफंड?
















Leave a Reply